Monday, 21 December 2015

KILL THE KILLER OF HUMANITY

निर्भया केस पर आये फैसले के बाद पढ़े ''बिहार-सवेरा'' टीम के ''विकाश जी'' की स्पेशल रिपोर्ट हिंदी में :-

भारतीय इतिहास में आज का यह काला दिन मै तो नहीं भूल सकता जब निर्भया केस पर  सुप्रीम कोर्ट ने भी यह कह दिया की मै कानून से ऊपर नहीं जा सकता .... एक सच्चे देशभक्त आज गाली देते होंगे उस कानून बनाने वाले को जिसने यह अँधा कानून बनाया...

16 DECEMBER की वह काली रात शायद ही आप भूल गए हो...बता दे आपको इसी दिन देश की बेटी निर्भया का बलात्कार कुल 5 लोग मिलकर किये थे|

 परन्तु निर्भया के बलात्कारी नाबालिक से बालिक बन कर छूटे उस हैवान की रिहाई को इतनी जल्दी नहीं भूल सकते....पहले बलात्कार करना फिर पेट में रड घुसा कर मार देना शायद मानव के रूप में जंगली जानवर से भी घिनौना हरकत करने वाले इस शख्स को मै तो कभी इंसान की श्रेणी में न ही रखूँगा .....!!!

रेपिस्ट को रविवार को ही छोड़ दिया गया था. फिलहाल उसे दिल्ली के ही एक एनजीओ की निगरानी में ऑब्जर्वेशन होम में रखा गया है. जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने तय प्रक्रिया के मुताबिक उसे दो साल तक एनजीओ की निगरानी में रखने का फैसला लिया है.

                  उस जानवर का नाम मो.और  अफरोज था साथ में 4 थे जिसमे 1 ने खुद जान दे दी और ३ को फांसी के तक्थे पर चढाने का फैसला दिया गया है ... परन्तु 20 दिसंबर 2015  के दिन उस हैवान/सैतान/जानवर को भारतीय उच्च न्यायालय ने रिहाई दे दी और उसे रिहा भी कर दिया गया .... और इसके साथ ही आमजनों को यह विश्वास दिला दिया की वाकई ""कानून अँधा होता है"

         आज एहसास हो गया ""निर्भया"" तुम हार गयी...ओ जीत गए और वे इसलिए जीते की उसे अँधा कानून ने जिताया....

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आज सारा देश एक स्वर में यही पुकार रहा है  "KILL THE KILLER OF HUMANITY"

Monday, 30 November 2015

जिलापदाधिकारी से मिल "चंपारण छात्र संघ" ने मोतीझील महोत्सव के खिलाफ सौंपा ज्ञापन

मोतीझील महोत्सवकर्मियों पर कार्यवाई सहित शहर की प्रतिष्ठा धूमिल होने के आरोप के साथ महोत्सव बंद कराने की जिलाधिकारी से मांग की...

 जिलाधिकारी से मिल चंपारण छात्र संघ के सदस्य रोहित राज ने देर रात महोत्सव में हुए अश्लील अर्द्धनग्न नाच का हवाला दिया व् तस्वीरे भी दिखाई...

चम्पारण छात्र संघ का प्रतिनिधिमंडल 4 सदस्यी प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मिला... महोत्सव कर्मियों पर शहर की प्रतिष्ठा धूमिल होने का लगाया आरोप... कार्यवाई सहित इसे भविष्य में बंद करने की मांग की गयी... प्रतिनिधिमंडल में रोहित राज,आशुतोष सिंह,राजन गुप्ता व् पिंकू प्रताप ने सौपा डीएम को ज्ञापन।डीएम ने जांच की दिलाई भरोसा व् कहा की दोषियों पर होगी कार्यवाई।
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Sunday, 29 November 2015

मोतीझील महोत्सव के विरोध में सड़को पर उतरा ''चंपारण छात्र संघ''








मोतीझील महोत्सव के कार्यक्रम की अभी अंतिम तैयारियां ही चल रही थी की सोशल साइट्स से लगातार विरोध के बाद ''चंपारण छात्र संघ'' इसके विरोध में अपनी पूरी टीम के साथ सरको पर उतर गया | ज्ञात हो की कल ही के दिन मोतीझील महोत्सव का शुभारम्भ किया गया और इसके सुभारम्भ के दिन ही चंपारण छात्र संघ ने अपने विरोधी तेवर को सरको पर ला खरा किया | शहर के भारी संख्या में छात्र ,युवा व् बुद्धिजीवी वर्ग इस विरोध में शामिल हुआ |विरोध की शुरुआत शहर के प्रमुख चौक गांधी चौक पर संघ के सदस्यों ने इसके विरोध में हस्ताक्षर अभियान चला कर किया साथ ही संघ के सदस्यों ने लोगो को बताया की मोतीझील के मौत पर इस महोत्सव का औचित्य तनिक भी जायज नहीं है यह महोत्सव मोतीझील के मौत पर जश्न जैसा है व् लोगो से भी इस सन्दर्भ में राय ली की यह होना चाहिए या नहीं |पुनः सदस्यों ने काले झंडे के साथ नगर परिसद मोतिहारी विरोधी नारे के साथ अपने तय कार्यकर्म विरोध मार्च की शुरुआत गांधी चौक से की जो मोतीझील पथ होते हुए महोत्सव स्थल तक पंहुचा |

उक्त कार्यक्रम व् विरोधमार्च का नेतृत्व चंपारण छात्र संघ के अध्यक्ष आशुतोष सिंह व् महासचिव राजन गुप्ता कर रहे थे|विरोध मार्च के महोत्सव स्थल पहुँचते ही छात्र-युवाओ के महकमे का गर्म विरोधात्मक तेवर देख महोत्सव की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे कार्यकर्ता वहा से खिसकते बने |इसके बाद चंपारण छात्र संघ के सदस्य वहा नगर परिसद मुर्दाबाद , कार्यक्रम संयोजक मुर्दाबाद सहित कई नारे लगाये...विरोध मार्च के शुरुआत के बाद सरक चलते लोगो का भी सहयोग उक्त मार्च में संघ को प्राप्त हुआ...

कार्यक्रम का नेतृत्व करते संघ के अध्यक्ष आशुतोष सिंह ने मीडिया से कहा की चंपारण के शिक्षा व् संस्कृति के दोहन को चंपारण छात्र संघ कभी बर्दास्त नहीं करेगा जब जब चंपारण के शिक्षा व् संस्कृति का दोहन होगा छात्र संघ इसी तरह सरको पर उतरेगा...

वही चंपारण छात्र संघ के महासचिव राजन गुप्ता ने कहा की मोतीझील महोत्सव का आयोजन मोतीझील को दिन प्रति दिन राजनितिक अखाड़ा बनाते जा रहा है मोतीझील महोत्सव का आयोजन मोतीझील के मौत पर जश्न जैसा है यह अनुचित है...

वही सोशल मीडिया पर मोतीझील महोत्सव के विरोध की कमान संभाले चंपारण छात्र संघ के संयोजक विकाश राज ने कहा की मोतीझील पीरा से कराह रही है उसे मनोज तिवारी और नीतू कुमारी नूतन के संगीत की आवश्यकता नही उसे सफाई की आवश्यकता है सांस्कृतिक कार्यक्रमों में जो बरी राशि खर्च हो रही है अगर उसका उपयोग मोतीझील के किसी हिस्से अथवा कुछ घाटो की सफाई कर दी जाए तो इससे मोतीझील को एक नया आयाम मिलेगा और अगर यह प्रति वर्ष होता रहे तो वह दिन दूर नहीं जब मोतीझील भी अपने खूबसूरती पर निखरा करेगी|



उक्त विरोध कार्यक्रम में चंपारण छात्र संघ के उपाध्यक्ष अमित प्रताप,प्रखंड संयोजक केशु श्रीवास्तव,दिवाकर सिंह,आशु सिंह,मनोज श्रीवास्तव,सिद्दार्थ राज ,रोहित राज,अस्करी राजा,विजय कुमार,कमलेश,गणेश,शिवम कुमार,आनंद कुमार बर्णवाल,रिंकू राज,अफरोज आलम,शुभम कुमार,अर्जुन कुमार,नासिर,मो इमरान,प्रकाश चन्द्र,नीरज कुमार,दीपनारायण,साहिल कुमार,राहुल रौशन,ललित प्रताप,गणेश कुमार,शुभम गुप्ता,योगेश गुप्ता,विवेक राज,गौरव,आशीष कुमार सहित दर्जनो छात्र युवा व् बुद्धिजीवी थे|

Saturday, 21 November 2015

चंपारण छात्र संघ ने किया मोतीझील महोत्सव का विरोध

मोतीझील महोत्सव का आयोजन मोतीझील के मौत पर जश्न जैसा :- विकास
मोतिहारी:-
अभी मोतीझील महोत्सव के द्वितीय वर्ष आयोजन की तैयारियां शुरू ही हुई की मोतीझील प्रेमिओ के विरोधी सुर निकलने शुरू हो गये !! मोतीझील के संरक्षण को लेकर पिछले वर्ष नगरपरिसद द्वारा मोतीझील महोत्सव का आयोजन किया गया था लेकिन पिछले 1 वर्ष में नप ने जनता को गुमराह किया है और पिछले 1 वर्ष तक मोतीझील का विकास नगण्य रहा है इसलिए चम्पारण छात्र संघ े पुन्ह मोतीझील महोत्सव के आयोजन पर विरोध जताता है उक्त बाते चम्पारण छात्र संघ के संयोजक विकास राज ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कहा।संघ के संयोजक विकास ने कहा की इस बार मोतीझील महोतसव का आयोजन मोतीझील के मौत पर जश्न जैसा है पहले मोतीझील का सौन्द्रियकरण हो फिर महोत्सव मनाया जाए ।

वही चंपारण छात्र संघ के अध्यक्ष आशुतोष सिंह विक्की ने विरोध जताते हुए कहा की मोतीझील के विकास को लेकर पिछले वर्ष महोत्सव में कहा गया था की फरवरी 2015 से काम चालू हो जाएगा लकिन वह भी नही हो पाया इसलिए मोतीझील महोत्सव बिलकुल भी उचित नही है नप को चाहिए की मोतीझील महोत्सव में खर्च की जाने वाली राशि मोतीझील के सफाई में खर्च हो ।
ज्ञात हो की पिछले वर्ष मोतीझील महोत्सव का आयोजन 29 से 30 नवम्बर के बीच किया गया था जिसमे राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार के मंत्री ने सिरकत की थी व् मोतीझील के सौन्द्रियकरण को बरे बरे वादे किये थे इसके अलावे बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार व् पूर्व मुख्यमंत्री जितनराम मांझी भी इस झील का निरक्षण कर काफी वादे कर चुके है लकिन अब तक कोई भी वादा धराताल पर नही उतर पाया है अब देखना यह है की मोतीझील महोत्सव का विरोध महोत्सव पर कितना प्रभाव डालता है।अन्य विरोध करने वालो में छात्र संघ के महासचिव राजन गुप्ता,नीरज गिरी,अमित प्रताप,योगेश गुप्ता,विवेक सिंह,गौरव राज,प्रखंड अध्यक्ष मोतिहारी केशु श्रीवास्तव,कुनाल सिंह,कुमार प्रकाश,विजय कुमार,आदि दर्जनों छात्र व् नगर प्रेमी है।

Friday, 6 November 2015

आना दाऊद को था मगर पकड़ा गया हिन्दू डॉन

"बिहार-सवेरा" के लिए 'विकाश जी' की स्पेशल रिपोर्ट:-

आज भारत हर तरफ से प्रगति कर रहा है चाहे वैश्विक निवेश की बात हो या एक शक्तिशाली राष्ट्र बनने की कवायत हो भारत हर ओर प्रगति कर रहा है...ओर इसी प्रगति का एक और शाक्ष्य अंडरवर्ल्ड के महशूर डॉन छोटा राजन को पकरना भी है.....

                   जी हाँ वही छोटा राजन जो कभी अंडरवर्ल्ड के मसहूर डॉन दाऊद का दाया हाथ था...1992 के मुंबई दंगे तक दाऊद और छोटा राजन साथ साथ थे...दरशल ये दंगे बाबरी मस्जिद गिरने के बाद हुए थे...भारत में 1992 व् 1993 के दंगे में 800 से अधिक भारतीय मारे गए थे दरशल ये दंगे बाबरी मस्जिद गिरने के कारण हुआ था सो इस दंगे के बाद मुंबई अंडरवर्ल्ड साम्प्रदाइक आधार पर बात गया...
दाऊद और छोटा राजन भी इसी आधार पर अपने आत्मसम्मान की लड़ाई को अलग हो गए...इसके बाद दाऊद छोटा राजन को खत्म करने में लगा था और छोटा राजन दाऊद को....बात उस वक्त की है महाराष्ट्र में शिव सेना की सरकार थी तब छोटा राजन खुलेआम कह रहा था की वह हिन्दुओ की लड़ाई लड़ रहा है मीडिया से भी मुखातिब होकर वह अक्सर अपने को एक हिन्दू डॉन बताता था व् कहता था हिन्दू विरोधी दाऊद को जब तक खत्म नहीं करेगा भारत में कदम नहीं रखेगा |

आज दाऊद तो खत्म नहीं हुआ मगर राजन लौट गया...आज ही राजन भारत लाया गया है....छोटा राजन के अनुसार दाऊद को पाकिस्तान की एजेंसी ISI ने हिफाजत में कराची सुरक्षित रखा है...2014 में मौजूदा सरकार ने दाऊद को 2014 तक भारत लाने के कयास लगये है ऐसा बता रहे थे लकिन पुलिस के हाथो अब तक कभी दाऊद नहीं चढ़ा.....पिछले दिनों भारत सरकार ने दाऊद के पूर्व गुर्गे व् वर्तमान दुश्मन हिन्दू डॉन के नाम से मसहूर छोटा राजन को इंडोनेसिया में गिरफ्तार किया जिसे आज ही अहले सुबह इंडोनेसिया के बाली एयरपोर्ट से विषेस विमान से भारत लाया गया है भारत आने के बाद राजन को सीबीआई के हवाले कर दिया है...
पुलिस का मानना है की दाऊद के बारे में विषेस जानकारी छोटा राजन से उपलब्ध हो पायेगा जिससे भारत सरकार के लिए MISSON  DAAUD कुछ आसान हो...छोटा राजन भारत सरकार के रिकॉर्ड में हत्या लूट अपहरण आदि के दर्जनो मामले में दर्ज है....फिलहाल राजन के सभी केस DELHI  व्  मुंबई पुलिस ने सीबीआई को सौप दिया है अब देखना यह है की दाऊद को पकरने में छोटा राजन दवरा सहयोग की भारत सरकार की कयास कहा तक सफल हो पाती है और कितनी जल्द भारत सरकार मुंबई हमले के दोषिओं को सजा दिला पाती है|

Thursday, 5 November 2015

बिहार सवेरा का बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एक्जिट पोल

बिहार विधानसभा चुनाव का आज अंतिम चरण का मतदान समाप्त हो गया. इस के साथ ही अब किसकी सरकार बनेगी, यह जानने के लिए लोगो में काफी उत्सुकता भी बढ़ गई. इसके लिए पेश है सब चैनलों की तरह हमारा भी एक्जिट पोल.
यह केवल एक अनुमान है, वैसे तो 8 नवंबर को मतगणना के दिन सब कुछ साफ हो जाएगा.
हमारे अनुसार, बिहार के 243 विधानसभा सीटों पर देखा जाए तो सभी सीटों पर कांटे की टक्कर है. लेकिन राजग (NDA) पूर्ण बहुमत की सरकार बनाती दिख रही है, जिसके खाते में 128 सीटें जाती दिख रही है, वही महागठबंधन के खाते में 110 और अन्य के खाते में 5 सीट जा सकती है.
अन्य चैनलों का एक्जिट पोल

''भारतीय रेल व् सरकार का खेल''


''बिहार-सवेरा''के लिए भारतीय रेलवे के दुर्दसा पर 'प्रणय राज'की स्पेशल रिपोर्ट:-


 वर्तमान में भारत के कुछ हिस्सों को छोर कर भारतीय रेलवे की स्थिति कही भी ठीक नहीं है....खासकर उत्तरप्रदेश,बिहार,झारखण्ड,उड़ीशा,व् दिल्ली के हिस्सों में सामान्य लोगो के के लिए भारतीय रेल के सामान्य डिब्बे में यात्रा करना किसी युद्ध से काम नहीं.....अक्सर रेलवे के जनरल डिब्बे का उपयोग सामान्य परिवार वाले व् गरीब परिवार के लोग ही करते है जिनमे सहनशीलता होती है...


और ये सहनशीलता हो भी क्यों क्यकि इसके अलावे इस वर्ग के पास कोई चारा भी तो नहीं है.....आज भले ही सरकार रेल बजट पास कर कितना भी वाहवाही क्यों कमा ले लकिन सही बात तो यह है की सरकार की नजर आज भी मध्यमवर्गीय रेल पैसेंजरों पर नही है तभी तो 90 लोगो के डिब्बे में 400 लोग यात्रा करते है...
आप मुम्बई, दिल्ली, पंजाब से उत्तर प्रदेश या बिहार रही किसी भी ट्रेन के सामान्य श्रेणी वाले डब्बे में बैठ के जायें आपको पता चल जाएगा इस देश के लोग कितने सहिष्णु हैं। सरकारें आती हैं किराया बढाती हैं सब के पास अपने कारण होते हैं। हम आम नागरिकों को कभी किराया बढ़ने से परेशानी नही होती सामान्य वर्ग की तो बस इतनी ही चाहत है की रेलवे के सामान्य दर्जे की वयवस्था सुधार दो ....

आप बुलेट ट्रेन का लोलीपोप दिखा रहे हो लेकिन जो सामान्य व्यव्श्था हमें चाहिए वो नही दे पा रहे क्योंकि आपसे दोनों में से कुछ नही होने वाला।विकास का लोलीपोप जनता को थमा कर उल्लू बनाने के बजाये कुछ काम अगर जनकल्याणकारी हो जाए तभी सही मायने में विकास समझा जाएगा
 

65 सालों में बाद भी अगर ट्रेन के शौचालय में बैठ के लोग हजारों किमी यात्रा कर रहे है तो ये उनलोगों के मुह पे तमचा है जो हेलीकॉप्टर, हवाई जहाज में घूमते हैं और AC कमरे में बैठ के कहते है "यार इस देश में असहिष्णुता बढ़ गयी है" तो दूसरा बोलता है "आप गलत बोल रहे हैं देश में सब ठीक है"
   कोई हक़ नही है इनलोगों को कुछ भी कहने का