Friday, 16 October 2015

मोतिहारी में PWD द्वारा बन रही सड़क में भारी अनियमितता

मोतिहारी स्थित धर्मसमाज रोड से नेशनल हाईवे 28 तक PWD द्वारा सड़क निर्माण कार्य कराया जा रहा है...जब निर्माण कार्य शुरू हुआ तो मुह्हाले वासिओ में खुशी की लहर थी की कम से कम बरसात के मौसम में नरकीय स्थिति से मुक्ति मिलेगी..!!
इस सड़क का निर्माण ऋषि कॉन्सट्रक्शन द्वारा हो रहा है जिसमे मुहल्लेवासियो की माने तो घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग हो रहा है...
100 मीटर सड़क बीच में ही छोड़ दिया गया है।प्राक्कलन के विरुद्ध निर्माणकार्य हो रहा है। विभाग द्वारा पर्वेक्षण की स्थिति अब तक नदारद है..कनीय अभियन्ता चुनाव कार्य में व्यस्त और सड़क कार्य भगवान भरोसे है..
मोहल्लेवासियों में रोष की स्थिति बनी हुई है।मुह्हाले के गणमान्य लोगो द्वारा कार्यपालक अभियंता को दिया आवेदन और की जांच की माँग भी की गयी ।प्रतिलिपि ज़िलापदधिकारी और प्रधान सचिव, पथ निर्माण विभाग को भी भेजा गया है ।

राजद सुप्रीमो लालू यादव के उपर गिरा पंखा, बाल-बाल बचे, हाथ में लगी चोट.

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की चुनावी रैलियों में आजकल कुछ न कुछ गलत हो रहा है। कभी मंच टूट रहा है तो कभी माइक खराब। आज मोतिहारी में उनकी रैली के दौरान सिलिंग फैन टूटकर गिर गया। लालू के साथ हो रही इन घटनाओं पर एक मतदाता ने तंज कसा, शायद उन्हें किसी की नजर लग गई है।
मोतिहारी विधानसभा क्षेत्र के लख़ौरा में आज दोपहर राजद की चुनावी रैली हो रही थी। इस दौरान मंच पर टंगा पंखा अचानक गिर पड़ा। घटना के समय लालू मंच पर चाय पी रहे थे। बताया जा रहा है कि पंखा उनके दाहिने हाथ पर गिरा, जिससे उन्हें चोट लगी। अगर पंखा सिर पर गिरता तो गंभीर दुर्घटना हो सकती थी।

घटना के बाद कुछ देर के लिए मंच पर अफरा-तफरी मच गयी, लेकिन लालू ने सभा को संबोधित किया। घटना से नाराज राजद सुप्रीमो ने पुलिस अधिकारियों को मंच पर बुलाकर 'अपने अंदाज में' डांट पिलायी। इसके लिए लालू ने एसपी को भी खरी-खोटी सुनाई और इसे सुरक्षा में चूक बताया।

Thursday, 15 October 2015

News @ 11 am

**चुनाव आयोग ने आचार संहिता के उल्लंघन के लिए जेडीयू अध्यक्ष शरद पवार को नोटिस भेजा

**प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी पांच नवंबर को जम्मू-कश्मीर जाएंगे. खबरों के मुताबिक पीएम वहां बगलिहार 2 हाइडल पावर प्रोजेक्ट का उद्घाटन करेंगे.

** पूर्वी चम्पारण विधानसभा:
स्क्रूटनी के दौरान नौ प्रत्याशीयों के नामांकन अवैध पाए गए.जिले के १२ विधानसभा के लिए 144 प्रत्याशीयों का नामांकन प्राप्त हुआ था, जो स्क्रूटनी के बाद अब 135 हो गया है

**बिहार विधानसभा दूसरे चरण के 6 जिलों के 32 सीटों पर वोटिंग जारी

**औरंगाबाद के रफीगंज के बूथ नं. 144 पर बम मिला

**बिहार विस चुनाव: दूसरे चरण में नौ बजे तक कई इलाकों से ईवीएम में गड़बड़ी की खबर.

**सुबह 10 बजे तक कुल 20.61 प्रतिशत वोटिंग

** मुजफ्फरपुर - नरकटियागंज रेल खंड के बेतिया छावनी रेलवे फाटक पर आरओबी निर्माण को स्वीकृति मील गयी है. रेलवे प्रशासन ने छावनी समपार फाटक संख्या 2 पर रोड-ओवर ब्रिज बनाने की हरी झंडी देते हुए प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दी है.

**तीसरे वनडे मैच के लिए राजकोट पहुंची टीम इंडिया..!

Wednesday, 14 October 2015

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की जंयती पर विशेष.


भारत के ‘मिसाइल मैन’ के रूप में लोकप्रिय डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की आज जयंती है. इस मौके पर कृतज्ञ राष्ट्र उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर रहा है. वे बेहद साधार पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते थे और जमीन और जड़ों से जुड़े रहकर
उन्होंने 'जनता के राष्ट्रपति' के रूप में लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई थी. समाज के सभी वर्गो और विशेषकर युवाओं के बीच प्रेरणा स्रोत बने डॉ. कलाम ने राष्ट्राध्यक्ष रहते हुए राष्ट्रपति भवन के दरवाजे आम जन के लिए खोल दिए जहां बच्चे उनके विशेष अतिथि होते थे.


एक सच्चे मुसलमान और एक नाविक के बेटे एवुल पाकिर जैनुलाबद्दीन अब्दुल कलाम ने 18 जुलाई 2002 को देश के 11वें राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला और उन्हें एक ऐसी हस्ती के रूप में देखा गया जो कुछ ही महीनों पहले गुजरात के सांप्रदायिक दंगों के घावों को कुछ हद तक भरने में मदद कर सकते थे. देश के पहले कुंवारे राष्ट्रपति कलाम का हेयर स्टाइल अपने आप में अनोखा था और एक राष्ट्रपति की आम भारतीय की परिभाषा में फिट नहीं बैठता था लेकिन देश के वह सर्वाधिक सम्मानित व्यक्तियों में से एक थे जिन्होंने एक वैज्ञानिक और एक राष्ट्रपति के रूप में अपना अतुल्य योगदान देकर देश सेवा की.



अत्याधुनिक रक्षा तकनीक की भारत की चाह के पीछे एक मजबूत ताकत बनकर उसे साकार करने का श्रेय डॉ. कलाम को जाता है और देश के उपग्रह कार्यक्रम , निर्देशित और बैलेस्टिक मिसाइल परियोजना , परमाणु हथियार और हल्के लड़ाकू विमान परियोजना में उनके योगदान ने उनके नाम को हर भारतीय की जुबां पर ला दिया.



पन्द्रह अक्तूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में पैदा हुए कलाम ने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी से स्नातक करने के बाद भौतिकी और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग का अध्ययन किया और फिर उसके बाद रक्षा शोध एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) से जुड़ गए. रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में शोध पर ध्यान केंद्रित करने वाले डा. कलाम बाद में भारत के मिसाइल कार्यक्रम से जुड़ गए. बैलेस्टिक मिसाइल और प्रक्षेपण वाहन तकनीक में उनके योगदान ने उन्हें ‘‘भारत के मिसाइल मैन’’ का दर्जा दिया.



भारत रत्न समेत कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किए गए कलाम ने 1998 में भारत द्वारा पोखरण में किए गए परमाणु हथियार परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. उस समय वाजपेयी सरकार केंद्र की कमान संभाल रही थी. शाकाहारी कलाम के बारे में एक बार कहा गया था कि उन्होंने भारत में कई तकनीकी पहलुओं को आगे बढ़ाया और उसी प्रकार वह खुद भी ‘‘मेड इन इंडिया’’ थे जिन्होंने कभी विदेशी प्रशिक्षण हासिल नहीं किया.



कलाम ने के आर नारायणन से राष्ट्रपति पद की कमान संभाली थी और वह 2002 से 2007 तक इस पद पर रहे. वे देश के सर्वाधिक लोकप्रिय राष्ट्रपति रहे. राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में उनका मुकाबला भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की क्रांतिकारी नेता लक्ष्मी सहगल के साथ था और वह इस एकपक्षीय मुकाबले में विजयी रहे. उन्हें राष्ट्रपति पद के चुनाव में सभी राजनीतिक दलों का समर्थन हासिल हुआ था.



राष्ट्रपति पद पर आसीन होने के साथ ही वह राष्ट्रपति भवन के सम्मान को नई ऊंचाइयां देने वाले पहले वैज्ञानिक बन गए.




बतौर राष्ट्रपति अपने कार्यकाल में कलाम को 21 दया याचिकाओं में से 20 के संबंध में कोई फैसला नहीं करने को लेकर आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा. कलाम ने अपने पांच साल के कार्यकाल में केवल एक दया याचिका पर कार्रवाई की और बलात्कारी धनंजय चटर्जी की याचिका को नामंजूर कर दिया जिसे बाद में फांसी दी गई थी.



उन्होंने संसद पर आतंकवादी हमले में दोषी करार दिए जाने के बाद मौत की सजा पाने का इंतजार कर रहे अफजल गुरू की दया याचिका पर फैसला लेने में देरी को लेकर अपने आलोचकों को जवाब दिया और कहा कि उन्हें सरकार की ओर से कोई दस्तावेज नहीं मिला. गुरू को बाद में फांसी दे दी गई थी.



बिहार में वर्ष 2005 में राष्ट्रपति शासन लगाने के विदेश से लिए गए अपने विवादास्पद फैसले पर भी कलाम को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था. हालांकि उन्होंने यह कहते हुए आलोचनाओं को खारिज कर दिया कि उन्हें कोई अफसोस नहीं है.



कलाम ने लाभ के पद संबंधी विधेयक को मंजूरी देने से इंकार करके यह साबित कर दिया था कि वह एक 'रबर स्टैम्प' संवैधानिक प्रमुख नहीं हैं. यह उनकी ओर से एक असंभावित कदम था जिसने राजनीतिक गलियारों विशेष रूप से कांग्रेस और उसके वामपंथी सहयोगियों के पैरों तले की जमीन खिसका दी थी.



अगले दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राष्ट्रपति को यह मामला समझाने गए और किसी प्रकार 'अयोग्यता निवारण संशोधन : विधेयक 2006 पर उनकी मंजूरी हासिल की'.



अपनी अनोखी संवाद कुशलता के चलते कलाम अपने भाषणों और व्याख्यानों में छात्रों को हमेशा शामिल कर लेते थे. व्याख्यान के बाद वह अक्सर छात्रों से उन्हें पत्र लिखने को कहते थे और मिलने वाले सभी संदेशों का हमेशा जवाब देते थे.



मिसाइल कार्यक्रम में उनके योगदान के लिए उन्हें 1997 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया. उन्हें 1981 में पद्म भूषण और 1990 में पद्म विभूषण प्रदान किया गया.



राष्ट्रपति पद पर अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद से कलाम शिलॉन्ग, अहमदाबाद और इंदौर के भारतीय प्रबंधन संस्थानों तथा देश एवं विदेश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में अतिथि प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थे. उन्होंने 'विंग्स आफ फायर' ,'इंडिया 2020' तथा 'इग्नाइट माइंड' जैसी कई पुस्तकें भी लिखीं जो काफी सराही गईं. कलाम के पिता के पास कई नौकाएं थीं जिन्हें वह स्थानीय मछुआरों को किराए पर देते थे लेकिन उन्होंने अपना खुद का कैरियर समाचारपत्र विक्रेता के रूप में शुरू किया था.

27 जुलाई 2015 को डॉ. कलाम ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया लेकिन उनकी प्रेरणा समूचे हिंदुस्तान के लिए खासकर युवाओं को हमेशा मार्ग दिखाते रहेगी

गोविंदगंज विधानसभा: कांटे की टक्कर होने की संभावना

गोविन्दगंज जो परिसीमन से पहले 20-गोविन्दगंज कहलाता था। यह 20 नम्बर भोजपुरी के बीस पड़ने यानि वर्चस्ववादी होने का एक अच्छा संयोग था। यहाँ से जितने वाले लोग हमेशा प्रभावी भूमिका में रहे। चाहे ध्रुवनारायण मणि तिवारी रहे हों या जनता दल सरकार में सिंचाई मंत्री रहे योगेन्द्र पाण्डेय या फिर देवेन्द्र नाथ दूबे या राजन तिवारी हर किसी की खास चर्चा हुई सूबे की सियासत में।

गोविन्दगंज का मूड बदला 2005 में जब जदयू की श्रीमती मीना द्विवेदी ने लोजपा के बाहुबली राजन तिवारी को फरवरी और नवम्बर के विस चुनावों में करारी शिकस्त दी। गोविन्दगंज की वर्चस्ववादी छवि टूटी पर साथ हीं अच्छी बात ये हुई कि जहाँ की नियति संगीनों के साये में कैद थी वो कहीं न कहीं आजाद हुई। श्रीमती द्विवेदी जो कि स्वं बाहुबली परिवार की महिला थीं और अपने देवर देवेन्द्र नाथ और पति भूपेन्द्र नाथ दूबे की सियासी विरासत को आगे बढ़ाने वाली थीं, ने क्षेत्र में कभी दबंगई को प्रश्रय नहीं दिया। अपने पति की तरह विद्वान और देवर की तरह लोकप्रिय बेशक न रहीं हों पर एक तबके में जो 'जियो और जीने दो' 'कमाओ खाओ और कमाने खाने दो' में विश्वास रखता है, में खासी जानी गयीं। पार्टी की एक अनुशासित नेता रहीं और कभी पारिवारिक विरासत के आधार पर कोई सरकारी पद नहीं माँगा।

आप सोच रहे होंगे कि इस आलेख का इतना हिस्सा मीना द्विवेदी पर हीं क्यों ? तो बता दूं कि गोविन्दगंज की चुनावी फिज़ा फिलहाल उन्हीं के कारण बदल गयी है। लगातार तीन बार जीत दर्ज करने के बावजूद पार्टी नेतृत्व ने उनका टिकट काट दिया। सो उन्होंने पार्टी के साथ-साथ अपनी उम्मीदवारी भी छोड़ दी। उनके मैदान खाली कर देने के बाद से उनके मतदाता आधार का स्पष्ट बंटवारा होता नहीं दिख रहा। एक ओर हैं राजू तिवारी जो एनडीए की ओर से लोजपा उम्मीदवार हैं.

दूसरी ओर हैं एनडीटीवी के पत्रकार रविश कुमार के भाई ब्रजेश कुमार पाण्डेय जो महागठबंधन में कांग्रेस प्रत्याशी हैं।

सपा के कृष्णकांत मिश्र और बहुजन समाज पार्टी की ओर से अरेराज नगर पंचायत की मुख्य पार्षद पूर्णिमा देवी के पति मंटू दूबे मैदान में हैं। समीकरण की नजरों से देखें तो कुल मिलाकर ब्राह्मण वार की स्थिति है। सभी ब्राह्मण बहुल गोविन्दगंज की अधिसंख्य ब्राह्मण मतदाताओं पर दावा ठोंक रहे हैं। पर सबकी अपनी-अपनी कमजोरियां हैं। राजू तिवारी का आपराधिक ग्राफ उनकी जीत पर संशय लगा रहा है तो कांग्रेसी उम्मीदवार अपने क्षेत्र के लिए हीं अनजान मालूम पड़ते हैं। कृष्णा मिश्र की ब्राह्मणों में पैठ दिखती है पर एक ओर बाहुबल तो दूसरी ओर धनबल के आगे वो काफ़ी निरीह दिख रहे हैं। मंटू दूबे अपने मामा जयप्रकाश पाण्डेय का नाम भुना सकते हैं पर विधायक के हिसाब से उनका कद काफी छोटा दिखता है।

गोविन्दगंज में नारायणी की बाढ़ और कटाव हाल तक एक बड़ा मुद्दा था जिसपर बिधायक रहते राजन तिवारी ने ज्यादा रूचि नहीं ली। स्वर्गीय भूपेन्द्र नाथ दूबे द्वारा 2003 में बांध बचाने की कोशिशों ने उनके कुनबे को जबर्दस्त सियासी ताकत दी जिससे उनकी विधवा श्रीमती मीना द्विवेदी लगातार तीन चुनाव जीतीं। अब जबकि नारायणी की धारा दक्षिण में मूड़ चुकी है और गोविन्दगंज का खतरा टल चूका है.

यहां का चुनावी मुद्दा भी वहीं है - 'बिजली-सड़क-रोजगार'
ब्राह्मण बहुल होने के कारण मूड तो एनडीए के पक्ष में है पर मतदाता सशंकित हैं। क्या राजू तिवारी खुद को बदलेंगे या एकबार फिर से गोविन्दगंज दबंगई के राज़ में चला जायेगा ! मीना द्विवेदी के मैदान छोड़ने से जहाँ पारिवारिक जुड़ाव रखने वाले मतदाता राजू तिवारी की ओर देख रहे हैं (राजू तिवारी भी देवेन्द्र नाथ दूबे के करीबी, उनके शिष्य रहे) हैं तो जदयू के कैडर वोट कांग्रेस को ट्रांसफर होगा,तय नहीं मान सकते।
गोविन्दगंज जो कि हमेशा अपने विशेष निर्णयों से चौकाता रहा है इस बार भी यहाँ लीक से हटकर कुछ होगा इसकी आशा बनी हुई है....


प्रस्तुति:- "अंकित दुबे"

Tuesday, 13 October 2015

हरसिद्धि विधानसभा: विकास नही बाहरी और स्थानीय के मुद्दे पर हो रहा है चुनाव

पूर्वी चम्पारण जिला के 12 विधानसभा मे एक मात्र विधानसभा आरक्षित है हरसिद्धि , इस सीट पर भी चौथे चरण यानी 1 नवंबर को चुनाव होंगे , यह सीट अभी भाजपा के कब्जे मे है !

पिछले 5 साल से कृष्ण नन्दन पासवान यहां के विधायक हैं , पिछली बार के चुनाव में यह सीट आरक्षित हो जाने से कृष्ण नन्दन पासवान भाजपा और राजद के सतीश पासवान मे टकराव हुआ था जिसमें कृष्ण नन्दन पासवान जीत गये , उस समय दोनों उम्मीदवार बाहरी थे , लेकिन इसबार गठबंधन हो जाने से फिर भाजपा से कृष्ण नन्दन पासवान को और महागठबंधन से राजद के स्थानीय निवासी राजेंद्र राम को उतारा गया हैं.

 वैसे तो इस विधानसभा से भी इस बार ढेर सारे उम्मीदवार अपना किस्मत आजमा रहे हैं , लेकिन मुख्य मुकाबला राजग और महागठबंधन के बीच हैं , हालाँकि इसबार कृष्ण नन्दन पासवान को बाहरी होने के कारण इस विधानसभा को कुछ अलग ही तरह से देखा जा रहा हैं ,
 वही जानकारों के अनुसार राजेंद्र राम को स्थानीय होने के कारण बढत दिख रही हैं , लेकिन दोनों प्रत्याशी अपने अपने जीत के दावे ठोक रहे हैं , वैसे तो पिछले पाँच सालों मे क्षेत्र का थोड़ा बहुत विकास हुआ हैं लेकिन वही हरसिद्धि थाना के आस पास कचरों का अम्बार मोदी के विधायक के लिए स्वच्क्ष भारत की पोल खोलता है.

सोनवरषा और रऩजीत के लोग आज भी बिजली के लिए तरस रहे है, वही परशुरामपुर से संग्रामपुर रोड , तुरकौलिया से जयसिंहपुर खैरवा रोड जर्जर हो चुकी है, हरसिद्धि से आप यादवपुर रोड में या पकड़िया रोड में जाए तो सालों भर कीचड़ ही मिलने वाला है.
हालाँकि जो पहले के विधायक थे जो यहां के स्थानीय उनके मुकाबले जीरो काम हुआ हैं , इस विधानसभा मे आरक्षण हो जाने से यहां के दिग्गज दिग्गज नेता जैसे पूर्व विधायक महेश्वर सिंह , पूर्व विधायक अवधेश कुमार कुशवाहाँ , पूर्व जिला परिषद् रह चुके राजेंद्र प्रसाद गुप्ता आदि को बाहर के विधानसभा मे जा के अपना किस्मत आजमाना पड़ रहा हैं , इसबार बाहरी और स्थानीय का मुद्दा कुछ ज्यादा उठ रहा हैं , इस विधानसभा मे दूसरे विधानसभा की तरह जाति अधारित समिकरण कुछ एेसा दिख नही रहा हैं , कुछ बड़े जाति के इधर भी हैं और उधर भी हैं , और दलित भी एसे ही आधे-आधे हैं , कुछ स्थानीय लोगों के माने तो उनका कहना हैं की एक बार तो देख लिया , अगर दूसरे बार भी एसा हुआ तो अगले चुनाव मे आरक्षण तोड़ने के लिए लड़ाई लड़ेगे ,,,
कुल मिला के यहां भी लड़ाई दिलचस्प हैं , आगे देखिए की कोई फिर बाहरी जीतता हैं की स्थानीय , या फिर यह सीट कोई और झटक लेता हैं ...
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प्रस्तुति:-तैयब हसन ताज व् राकेश कुमार

रामविलास पर परिवारवाद हावी..प्रत्याशी का टिकट छीन अपने दामाद को थमाया...!!

 मुजफ्फरपुर बोचहा की सीट से लोजपा टिकट छीनने के बेबी कुमारी निर्दलीय चुनाव लडेगी। टिकट सिम्बाल छीनने के खेल का 18 अक्टूबर को खुलासा होगा। मालूम हो कि भाजपा नेता बेबी कुमारी को लोजपा ने टिकट दिया। बेबी के नामांकन के बाद टिकट बदलकर लोजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने अपने दमाद अनिल कुमार साधु को टिकट दिया। अनिल साधु के टिकट मिलने का व्यापक रियेक्शन हैं। पब्लिक व राजग नेताओं की गोलबंदी बेबी के पक्ष में होने लगी है। बेबी कुमारी ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद वह भाजपा का समर्थन करेगी। वैसे मंगलवार को अनिल कुमार साधु ने लोजपा से नामांकन किया।

"बिहार सवेरा" के लिए डॉ. चंद्र सुभाष की रिपोर्ट

क्या रूख देख के भाजपा ने दुशमन बदल लिया..?

जैसे चुनावी चरण शुरू हुए हैं एक बात तो स्पष्ट दिख रही है कि अब बीजेपी निशाने पर महागठबंधन के बजाय लालू को ले रही है। यह काफी हद तक ध्यान देने वाली और समझने वाली बात है की अचानक से भाजपा ने अपना निशाना बदलकर लालू की तरफ क्यों कर दिया ? ऐसी क्या वजह हो सकती है की भाजपा नितीश से भिड़ना नही चाह रही है या उन्हें नजरअंदाज कर रही है??
     मेरी समझ से इसके दो कारण हो सकते हैं। पहला तो ये की नितीश की छवि बिहार में विकास पुरुष के तौर पर है। पिछले 10 साल के शासन में 7 साल तक भाजपा भी नितीश की साथी रह चुकी है और ऐसे में पूरी तरह से नितीश को फेल बताने में खुद की भी किड़किरि होगी। नितीश के "विकास पुरुष" वाली छवि की तुलना में लालू एक सजायाफ्ता मुजरिम हैं और जमानत पे बाहर हैं, उन्हें "जंगलराज का जनक" भी कहा जाता रहा है तथा कही न कहीं आज भी लोगों के मन में उस जंगलराज का डर है। इसलिए उस जंगलराज का डर दिखा कर वोट लेना ज्यादा आसान है।
         एक और मुख्य कारण यह हो सकता है की अगर चुनाव बाद स्थिति ऐसी बनती है की महागठबंधन में नीतिश CM बनने की स्थिति में ना हों (अगर राजद जदयू से ज्यादा सीट जीत जाये तो इसके पुरे आसार हैं) तो वो राजग के साथ हो लें। इसकी उम्मीद कम है लेकिन प्यार और युद्ध में सब जायज है। ऐसे में लालू अकेले पड़ जायेंगे।
      खैर अनुमान बहुत हैं अंजाम तो 8 नवंबर को ही पता चलेगा तबतक लोकतंत्र के इस पर्व का आनंद लीजिये और हाँ वोट जरूर दीजियेगा।

"बिहार-सवेरा" के लिए ''प्रणय राज'' की स्पेशल रिपोर्ट:-

News @ 7:30 am

* जदयू ने पिपरा विधानसभा से कृष्णचंद्र को अपना उम्मीदवार घोषित किया है.
इसके पहले पार्टी ने अवधेश कुशवाहा को उम्मीदवार घोषित किया था. लेकिन, स्टिंग ऑपरेशन में फंस जाने के कारण उनसे उम्मीदवारी छीन ली गयी थी

* बिहार विधानसभा चुनाव: आज शाम को थम जाएगा, दूसरे चरण के चुनाव के प्रचार का शोर.
6 जिलों के 32 सीटों पर शुक्रवार को वोटिंग.

* केमिस्ट व ड्रगिस्ट की हड़ताल आज.
पूर्वी चम्पारण के लगभग डेढ़ हजार दवा की दुकानें आज बंद रहेगी. उक्त जानकारी केमिस्ट और ड्रगिस्ट एेसोशियेसन के अध्यक्ष अस्फाक करीम ने दी. उन्होने बताया कि कल देश भर के 8 लाख केमिस्ट एंव 40 लाख कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे.

* पूर्वी चंपारण के १२ विधानसभा में अब तक १०१ प्रत्याशी कर चुके है नामांकन.
आज है नामांकन करने की अंतिम तिथि.

* अरूण जेटली बने एशिया के "फाईनेंस मिनिस्टर ऑफ द ईयर"

* ब्रिटेन में मोदी एक्सप्रेस बस की शुरूआत.
१२ से १४ नवंबर तक ब्रिटेन दौरे पर रहेंगे पीएम मोदी.
"यूके वेलकम्स मोदी" में भाग लेंगे 60,000 लोग.
भारतवंशियो मे उत्साह.

* भारत-द. अफ्रिका दूसरा वनडे आज.
हार के बाद जीत से लय में आने की कोशिश करेगी टीम इंडिया.
आज इंदौर में दोपहर डेढ़ बजे से मैच.

"बीजेपी ने झोंकी यहाँ अपनी पूरी ताकत...क्या यही होंगे मुख्यमंत्री उम्मीदवार"

 "बिहार-सवेरा" के लिए "विकाश जी" की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट:-



जी हाँ बिहार विधानसभा का एक ऐसा सीट भी जिसमे बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोक दी है....यह स्पेशल विधानसभा है "दिनारा"....यहाँ के प्रत्यासी है बीजेपी संगठन में परदे के पीछे रह कर काम करने वाले "राजेंद्र सिंह"...

               इस विधानसभा सीट पर पूरा झारखण्ड एक पाँव पर खरा है इसके अलावा उत्तर प्रदेश के भी काफी कार्यकर्त्ता खरे है अब तक इस विधानसभा का दौरा बिहार के वरिस्ट नेताओ के साथ साथ झारखण्ड के मुख्यमंत्री व् मंत्रीगण भी कैंपियन कर चुके है...

एक साधारण विधानसभा में पूरा झारखण्ड विस के मंत्री,विधायक,उत्तर प्रदेश के अयोध्या सांसाद,इलाहाबाद सांसद,बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित साह,केंद्रीय मंत्रीगण आदि का कैंपियन क्यों हो रहा है...हालांकि बीजेपी ने इसकी औपचारिक घोसना नही की है लकिन झारखण्ड विस के मंत्री पत्रकारों से बात करते हुए कह रहे थे की यह सीट इस बार हॉटसीट है...लगभग यही बोल अन्य नेताओ का भी है...वैसे जानकारों के अनुसार राजेंद्र सिंह पिछले ३ दशक से बीजेपी के लिए कार्यरत है और इन्होने संघठन के लिए झारखण्ड,बिहार,और उत्तरप्रदेश में कार्य किया है |

                               चुकी राजेंद्र सिंह बीजेपी का कोई नामी चेहरा भी नहीं है फिर भी उनके लिए इतना महकमा कही न कहि राजनितिक जगत में यह तो खलबली मचा ही देता है की कही राजेन्द्र सिंह ही तो बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हो...अब देखना है की आगे होता क्या है.....



Monday, 12 October 2015

मोतिहारी विधानसभा एक नजर में


पूर्वी चम्पारण जिले के 12 विधानसभा सीटों में एक है मोतिहारी की सीट। मोतिहारी पूर्वी चम्पारण का मुख्यालय भी है। इस सीट पर चौथे चरण में यानी कि 1 नवंबर को चुनाव होंगे।
 यह सीट अभी भाजपा के कब्जे में है। पिछले 10 साल से प्रमोद कुमार यहाँ के विधायक हैं। पिछली बार नवंबर 2010 में उन्होंने राजद के राजेश गुप्ता को बड़े अंतर से हराया था। तब जदयू भाजपा साथ थी लेकिन अभी स्थितियां उलट हैं। इस बार जदयू राजद के साथ है और राजग का भी समीकरण बदल चूका है।

           वैसे तो ढेर सारे प्रत्याशी चुनाव में भाग ले रहे हैं लेकिन मुख्य मुक़ाबला इस बार राजग और महागठबंधन के बीच होने की उम्मीद है। राजग की ओर से एक बार फिर प्रमोद कुमार भाजपा के टिकट पर लड़ रहे हैं
वही दूसरी ओर महागठबंधन की और से विनोद श्रीवास्तव राजद के टिकट पर मैदान में हैं।हालाँकि मोतिहारी विस के लिए पहले महागठबंधन की सीट मणिभूषण श्रीवास्तव को दी गयी थी परन्तु पुनः उनसे यह सीट छीन कर विनोद श्रीवास्तव को दे दी गयी... दोनों अपनी जीत के दावे थोक रहे हैं।

      वैसे तो पिछले 10 सालों में काफी विकास हुआ है शहर का लेकिन बीते एक साल में अपराध का स्तर बढ़ गया है। शहर के ह्रदय में स्थित मोतीझील जिसको पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है वो अबतक अतिक्रमणकारियों की मार झेल रही है। इसके विकास के लिए वादे तो सब करते है लेकिन चुनाव बाद भूल जाते हैं। शहर में होने वाली जाम की समस्या भी मुख्य मुद्दा है। इस से उबरने के लिए बलुआ ओवरब्रिज का निर्माण एक उपलब्धि है। अभी और भी काम करने की जरुरते हैं। इसके अलावे शहर में पानी निकलने की सुचारू व्यवस्था न होना, चीनी मिल का बंद होने जैसी और भी समस्याएं हैं।

         बिहार में चुनाव हो और जाति आधारित समीकरण न हो ऐसा नही हो सकता। विनोद श्रीवास्तव जी अपनी पार्टी के परम्परागत वोट बैंक MY समीकरण के साथ ही कायस्थ वोटों की उम्मीद में हैं परन्तु मणिभूषण श्रीवास्तव की नाराजगी कुछ घातक हो सकती है और मणिभूषण समर्थक कुछ कायस्थ वोट कट सकता है...वैसे विनोद श्रीवास्तव के नामांकन समारोह की भीर भी राजनितिक विस्लेशको को सकते में ड़ाल दिया है... तो दूसरी ओर प्रमोद जी की सामजिक छवि अच्छी है और वो अपने क्षेत्र के लोगों से मिलते रहते हैं। पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखते हैं ये उनके पक्ष में है। ऊपर से मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ना भी उनके पक्ष में जा रहा है। एक बात तो तय लगती है की इस बार निर्णायक वोट उन युवाओं के होंगे जो पहली बार वोट डालने जा रहे हैं।इन सबो के बीच शहर के विकास की निम्नस्तरीय स्थिति को देखते हुए कउच्च युवा शहर वासिओ से नोटा दबाने की अपील कर रहे है ...कुल मिला के चुनाव दिलचस्प होगा। देखना है की लालू का समीकरण काम करता है या मोदी जी के वायदों में जनता फिर से विश्वास दिखाती है या फिर कोई तीसरा छुपा रुस्तम बन के बाजी मार लेता है।

प्रस्तुति:-प्रणय राज

Sunday, 11 October 2015

धोनी नही, हमारे गेंदबाज रहे हार की असली वजह

बीते दिन कानपुर के ग्रीन पार्क क्रिकेट मैदान पर साउथ-अफ्रीकी टीम के हाथों 5 रन से हारने के बाद तमाम क्रिकेट प्रेमी भारतीय पारी के एकमात्र आखिरी ओवर पर फोड़ रहे हैं. आखिरी ओवर में आकर प्रेशर में रन बनाना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता. धोनी और बिन्नी दोनों ही बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में आउट होकर लौटे जो कि किसी भी निर्णायक ओवर में सबसे कारगर शॉट भी साबित हो सकता है.
 
लेकिन उससे पहले भी टीम इंडिया के कई खिलाड़ियों ने ऐसा प्रदर्शन किया जो कि हार की बड़ी वजह रही. भारतीय टीम की हार की सबसे बड़ी वजह रही टीम की खराब गेंदबाज़ी. गेंदबाज़ी में भी खासकर तेज गेंदबाज जो काफी महंगे साबित हुए.

टीम इंडिया के गेंदबाज़ों को कल अश्विन की पीठ में लगी चोट का खामियाज़ा भुगतना पड़ा. अश्विन इस मुकाबले में कुल 5 ओवर भी पूरे नहीं कर पाए. लेकिन फिर भी बड़ा सवाल यही उठता है कि भारत की गेंदबाजी कब सुधरेगी? टी-20 में जो गलतियां की उससे गेंदबाजों ने वनडे में भी कुछ नहीं सीखा.

# जिस मैदान पर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए टीम का औसत स्कोर 230 रन के आस-पास है वहां पर भारतीय गेंदबाज़ों के सामने दक्षिण अफ्रीका ने 303 रन बना डाले.

# इतना ही नहीं भारतीय गेंदबाजी की वजह से कानपुर में एक नया रिकॉर्ड भी बन गया. इससे मुकाबले से पहले कभी कोई टीम कानपुर में 300 रन नहीं बना पाई.

# डेथ ओवर की कमज़ोरी एक बार फिर भारतीय टीम को भारी पड़ी मुकाबले के 40 ओवर खत्म होने के वक्त साउथ-अफ्रीकी टीम 200 रन भी पूरे नहीं कर पाई थी और पारी के आखिरी 10 ओवर में गेंदबाजों ने 109 रन लुटा दिए.

# भारतीय गेंदबाज़ों की खराब हालत के पीछे का कारण अश्विन की पीठ में दर्द ही बताया जा रहा है क्योंकि अश्विन के बचे 6 ओवर बाकी गेंदबाज़ों को मिलकर डालने पड़े. लेकिन अगर हम इस वजह पर गौर करें भी तो ये भी अहम है कि हमेशा अश्विन टीम के साथ नहीं होंगे तो तब मुकाबलों में क्या होगा. जिस तरह आगे सीरीज़ के बचे 4 मुकाबलों में होने वाला है.

# तेज़ गेंदबाज़ी में भारतीय टीम का नेतृत्व कर रहे गेंदबाज़ों में से कोई एक भी किफायती साबित नहीं हुआ. तेज गेंदबाजों की पूरे मैच में खूब धुनाई हुई. उमेश यादव ने 10 ओवर में 71 रन लुटा दिए. तो वहीं भुवनेश्वर कुमार ने 67 रन पिटवाए. स्टुअर्ट बिन्नी ने 8 ओवर में 63 रन दिए.
 
# भारतीय गेंदबाजों की सबसे ज्यादा पिटाई दक्षिण अफ्रीका के कप्तान एबी डिविलियर्स ने की. डीविलियर्स ने नाबाद शतक लगाया और तेज़ गेंदबाज़ों को उन पर हावी होने का कोई मौका नहीं दिया.

# मैच के डेथ ओवर्स में खराब गेंदबाज़ी का एक नमूना ये भी रहा. 40 ओवर के बाद डिविलियर्स 50 गेंद पर 45 रन बनाकर खेल रहे थे. वहीं आखिरी ओवरों में डिविलियर्स ने सिर्फ 23 गेंद पर 59 रन बना दिए. यानी 200 से भी ज्यादा के स्ट्राइक रेट से.

बेतिया विधानसभा एक नजर में

बापू की कर्मभूमि तथा अनेक वीर सपुतों की भूमि रही चंपारण की एक इकाई पश्चिम चम्पारण है।इसका जिला मुख्यालय बेतिया है।बेतिया तथा मझौलिया दो प्रखण्डों को मिलाकर बेतिया-मझौलिया विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की संज्ञा दी गई है।जिला मुख्यालय होने के कारण पुरे जिले की नजर इस क्षेत्र पर केन्द्रित है।
      बेतिया विधान सभा-2015 के चुनावी परिदृश्य पर चर्चा करने से पहले डालते हैं बेतिया के आम समस्याओं पर एक नजर-
जैसा कि बिहार के हर क्षेत्र में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है बेतिया भी इन समाजिक समस्याओं के चंगुल से मुक्त नहीं है।बेतिया छावनी में ओवरब्रिज की कमी अक्सर खलती है।इससे आये दिन वहां जाम की स्थिति बनी रहती है जिससे यातायात प्रभावित होता है तथा आम जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पडता है।अभी तक बेतिया के जनप्रतिनिधी सिर्फ वादे ही कर पाए हैं।अतः छावनी ब्रिज बनने के बारे में भविष्य में अभी कोई संभावना नजर नहीं आ रही है।पर्यटन और मनोरंजन की व्यवस्था भी काफी लचर है।2000 के दशक मे बेतिया मे पाँच सिनेमा घर हुआ करते थे तथा सभी के सभी नये तथा पुराने फिल्मों से गुलजार रहते थे।पर आज देखा जाए तो मात्र एक ही सिनेमाघर(जनता) की हालत संतोषजनक है बाकी सब की हालत दयनीय है।पर्यटन के क्षेत्र में देखा जाए तो बेतिया इसमें भी समस्याओं से जूझ रहा है।दो साल पहले बेतिया सागर पोखरा में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बोटिंग की व्यवस्था की गई थी लेकिन पर्याप्त देखरेख व रखरखाव में कमी के कारण वो बोट भी खराब हो गये तथा बोटिंग बंद हो गई।इसके अलावा क्षेत्र में बिजली की भी भारी किल्लत है।सडको के तरफ निगाह डालें तो बेतिया शहर में सडकों की हालत बद से बदतर है।नालों की उचित व्यवस्था नहीं रहने के कारण बरसात में नाले का पानी सडकों पर चला आता है।टुटे हुए सडकों पर ये पानी नारकीय स्थिति उत्पन्न कर देता हैं।
मोतिहारी से बेतिया को जोडने वाले NH-28 B की हालत तो बद से बदतर है।यदि कोई एक बार इस रास्ते से बस के द्वारा यात्रा कर ले तो वो दुबारा जाने की हिम्मत नही करेगा।
   सबसे दयनीय स्थिति बेतिया राज की है।राज के जमीन पर अतिक्रमणकारियों द्वारा अवैध कब्जा जारी है।राज देउड़ी में मौजुद राजघरानों की धरोहरें समुचित देखभाल के अभाव में बर्बाद हो रहे हैं।राजकचहरी मे मौजूद बेतिया राज से संबंधित दस्तावेज रखरखाव के अभाव में दीमक और टीड्डों का ग्रास बन रहे हैं।
 ये तो शहरी समस्याएं हैं अभी कई समाजिक तथा ग्रामीण समस्याओं से हमारा बेतिया विधान सभा क्षेत्र जुझ रहा है।जिला प्रशासन की बात की जाय तो वर्तमान जिलाधिकारी लोकेश कुमार के आने से भ्रष्ट कर्मचारीयों पर कुछ लगाम कसा है।वहीं वर्तमान एस.पी. विनय कुमार के द्वारा क्राइम कंट्रोल की कवायद कुछ हद तक संतोषजनक है।
बेतिया विधान सभा चुनाव - बिहार विधान सभा चुनाव-2015 का शंखनाद हो चुका है, चुनावी बिगुल बज चुके हैं।ऐसे में यहां के सियासी समीकरणों से आपको रुबरू कराने जा रहा हुँ।

बेतिया क्षेत्र से भाजपा की उम्मीदवार श्रीमती रेणु देवी(NDA) हैं जिन्होंने 8 अक्टूबर को अपना नामांकन पत्र दाखिल कर चुकी हैं।रेणु देवी वर्ष 2000 ई. से ही वर्तमान तक लगातार बेतिया क्षेत्र से विधायक पद पर बनी हुई हैं।पिछले विधान सभा चुनाव 2010 में इन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी श्री अनिल कुमार झा( निर्दलीय) को मतों के भारी अंतर से हराया था।इसमें रेणु देवी को 42010 मत तथा अनिल कुमार झा को 13221 मत मिले थे।इस बार अनिल कुमार झा द्वारा इस चुनाव में लडने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।वर्तमान में ये जदयू के नेता हैं।

महागठबंधन के तरफ से बेतिया की सीट कांग्रेस को मिली है तथा उम्मीदवार हैं श्री मदनमोहन तिवारी।ये पिछले विधान सभा -2010 में कांग्रेस से चुनाव लड़े थे तथा 12499 मतों के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे।
समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार श्री शंभू गुप्ता हैं।ये अपना नामांकन 10 अक्टूबर को किये।ये पिछले चुनाव 2010 में निर्दलीय चुनाव लड़े थे तथा इनको मात्र 3713 मत मिले थे।
जनता दल (R) से प्रत्याशी हैं रिजवानुल।ये 8 अक्टूबर को नामांकन पत्र दाखिल किये।
     अभी तक बेतिया विधान सभा क्षेत्र से इतने ही प्रत्याशीयों ने अपना नामांकन दाखिल किया है।बाकी आगे अभी भी समय है।निर्दलीय उम्मीदवारों में कौन कौन से चेहरे आते हैं ये तो वक्त ही बताएगा।वैसे कोई भी बड़ा चेहरा निर्दलीय से आता हुआ दीख नहीं रहा।
क्षेत्र में चारों तरफ चुनाव को लेकर काफी चर्चे हो रहे हैं।हर चाय व पान के दुकान चौक-चौराहों तथा गाँव देहात सभी जगह तर्क वितर्क होने लगे हैं।सभी आम जन चुनाव में खडे प्रत्याशीयों तथा उनके पार्टियों के चरित्र और उनके विकास के कार्य करने की योग्यता का समीक्षा करने में जुट गये हैं।
नेताजी लोगों का जनसंपर्क अभियान जोरशोर से जारी है।जनता प्रश्न पूछ रही है कि पुराने वादे कहाँ तक पुरे हुये या आप पर कैसे भरोसा करे।बेचारे नेताजी निरुत्तर हो जाते हैं।कहते हैं इसबार हम कार्य नहीं कर सके अगली बार जरुर करेंगे।एक बार हमें मौका दें कहकर आगे बढ जाते हैं।हास्यास्पद स्थिति उत्पन हो जाती है।
   वैसे कुछ दशकों का इतिहास देखा जाय तो बेतिया विधान सभा क्षेत्र भाजपा का गढ़ रहा है।यहां की वर्तमान विधायिका श्रीमती रेणु देवी 2000 ई. से हीं अभी तक लगातार जीत दर्ज करती आ रही हैं।परन्तु अभी के पार्टियों के गठबंधन पर नजर डाला जाय तो इस बार के चुनाव में काँटे की टक्कर होने की संभावना लग रही है।महागठबंधन में (राजद+जदयु+कांग्रेस) तीनों पार्टियों के गठजोड़ होने से जातीय समीकरण कुछ बदल गए हैं।इस कारण मुख्य लडाई रेणु देवी(भाजपा) और मदनमोहन तिवारी(कांग्रेस) के बीच हीं होगी।
  नेता अपना चुनावी बोल बोल रहे हैं तथा अपने लच्छेदार बातों से जनता को लुभा रहे हैं।पर सुविधाओं में उदासीनता को लेकर लोगों में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी आक्रोश का माहौल बना हुआ है।फिर भी अब देखना ये है कि जनता अपना कीमती मत देने में एक बार फिर भावनाओं में बहकर जातीय समीकरणों को अपनाती है या जातीय भेदभाव से ऊपर उठकर विकासवादी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए अपना मत योग्य उम्मीदवार या पार्टी को देकर अपने तथा अपने आने वाले भविष्य को संवारने का कार्य करती है।निश्चय हीं यह एक रोचक पहलु होगी जो अभी भविष्य के गर्त में है।

प्रस्तुति-: राजीव कुमार मिश्रा

मंच से ही उठाकर पटक देंगे:-लालू

जी हाँ जो अपने को हर मंच से जनता का सेवक कहकर वोट की अपील कर रहा है आज वही अपने पुराने अंदाज में दिखा...बात लालू प्रसाद यादव की हो रही है जो गया के एक चुनावी सभा को सम्बोधित करने पहुंचे थे
जैसे ही उन्होंने माइक में बोलना शुरू किया माइक का तार निकल गया ओर आवाज जनता तक नहीं गयी..इस पर लालू यादव गुस्से से लाल हो गए और माइक ऑपरेटर को लगे कहने की "हिये उठा कर पटक देंगे"....इसके अलावे उन्होंने उस ऑपरेटर को काफी भला बुरा कहा...हालांकि ऑपरेटर के माइक ठीक करने पर लालू ने उक्त सभा को सम्बोधित किया...
                     अब सवाल यह उठता है की यह नेता लोग सेवक की बात कर के जनता से वोट तो ले लेंगे की अगर इनका तेवर यही रहा तो चुनाव बाद जनता का क्या होगा|

""बिहार सवेरा"" के लिए "विकाश जी" की खबर ....

मान मनौअल के बाद पीएम मोदी की कैमूर रैली को हाँ...

"बिहार-सवेरा" के लिया 'विकाश जी' की खबर....

 

जी हाँ एक ऐसा भी शक्श है जिसने प्रधानमन्त्री मोदी की ही कैमूर रैली को इजाजत नहीं दी...ये शक्श है कैमूर के जिलाधिकारी देवेश सेहरा...
हालाँकि डीएम ने इस रैली की इजाजत सुरक्षा कारणों से नहीं दी थी...डीएम ने कहाथा की कैमूर झारखण्ड,व् उप्र. के बॉर्डर पर है जो एक नक्सलप्रभावित क्षेत्र है...

उन्होंने यह भी कहा की प्रधानमंत्री के रैली में काफी भिर होती है जिसमे शुरक्षा चूक हो सकती है...हालांकि बीजेपी के वरिस्ट नेताओ द्वारा रैली में मात्र ३०००० लोगो की छोटी भिर का वादा कर डीएम को मना लिया है...इसके बाद तमाम अटकलों पर विराम लग गया की मोदी की कैमूर रैली स्थगित हो गयी...एक तरफ कल बिहार में प्रथम चरण का चुनाव है वही दूसरी ओर pm की जनसभा....इस सन्दर्भ में लालू यादव ने चुनाव आयोग से रैली के सीधे प्रशारण पर रोक लगाने की मांग यह तथ्य दे कर की है की मोदी के रैली व् भाषण मतदान करने जा रहे जनता को गुमराह कर सकता है...अब देखना यह है की चुनाव आयोग इस पर क्या एक्शन लेता है|लालू यादव ने इसे आदर्श आचार संहिता के उलंघन का भी मामला बताया...|