Thursday, 5 November 2015

''भारतीय रेल व् सरकार का खेल''


''बिहार-सवेरा''के लिए भारतीय रेलवे के दुर्दसा पर 'प्रणय राज'की स्पेशल रिपोर्ट:-


 वर्तमान में भारत के कुछ हिस्सों को छोर कर भारतीय रेलवे की स्थिति कही भी ठीक नहीं है....खासकर उत्तरप्रदेश,बिहार,झारखण्ड,उड़ीशा,व् दिल्ली के हिस्सों में सामान्य लोगो के के लिए भारतीय रेल के सामान्य डिब्बे में यात्रा करना किसी युद्ध से काम नहीं.....अक्सर रेलवे के जनरल डिब्बे का उपयोग सामान्य परिवार वाले व् गरीब परिवार के लोग ही करते है जिनमे सहनशीलता होती है...


और ये सहनशीलता हो भी क्यों क्यकि इसके अलावे इस वर्ग के पास कोई चारा भी तो नहीं है.....आज भले ही सरकार रेल बजट पास कर कितना भी वाहवाही क्यों कमा ले लकिन सही बात तो यह है की सरकार की नजर आज भी मध्यमवर्गीय रेल पैसेंजरों पर नही है तभी तो 90 लोगो के डिब्बे में 400 लोग यात्रा करते है...
आप मुम्बई, दिल्ली, पंजाब से उत्तर प्रदेश या बिहार रही किसी भी ट्रेन के सामान्य श्रेणी वाले डब्बे में बैठ के जायें आपको पता चल जाएगा इस देश के लोग कितने सहिष्णु हैं। सरकारें आती हैं किराया बढाती हैं सब के पास अपने कारण होते हैं। हम आम नागरिकों को कभी किराया बढ़ने से परेशानी नही होती सामान्य वर्ग की तो बस इतनी ही चाहत है की रेलवे के सामान्य दर्जे की वयवस्था सुधार दो ....

आप बुलेट ट्रेन का लोलीपोप दिखा रहे हो लेकिन जो सामान्य व्यव्श्था हमें चाहिए वो नही दे पा रहे क्योंकि आपसे दोनों में से कुछ नही होने वाला।विकास का लोलीपोप जनता को थमा कर उल्लू बनाने के बजाये कुछ काम अगर जनकल्याणकारी हो जाए तभी सही मायने में विकास समझा जाएगा
 

65 सालों में बाद भी अगर ट्रेन के शौचालय में बैठ के लोग हजारों किमी यात्रा कर रहे है तो ये उनलोगों के मुह पे तमचा है जो हेलीकॉप्टर, हवाई जहाज में घूमते हैं और AC कमरे में बैठ के कहते है "यार इस देश में असहिष्णुता बढ़ गयी है" तो दूसरा बोलता है "आप गलत बोल रहे हैं देश में सब ठीक है"
   कोई हक़ नही है इनलोगों को कुछ भी कहने का



No comments:

Post a Comment