पूर्वी चम्पारण जिले के 12 विधानसभा सीटों में एक है मोतिहारी की सीट। मोतिहारी पूर्वी चम्पारण का मुख्यालय भी है। इस सीट पर चौथे चरण में यानी कि 1 नवंबर को चुनाव होंगे।
यह सीट अभी भाजपा के कब्जे में है। पिछले 10 साल से प्रमोद कुमार यहाँ के विधायक हैं। पिछली बार नवंबर 2010 में उन्होंने राजद के राजेश गुप्ता को बड़े अंतर से हराया था। तब जदयू भाजपा साथ थी लेकिन अभी स्थितियां उलट हैं। इस बार जदयू राजद के साथ है और राजग का भी समीकरण बदल चूका है।
वैसे तो ढेर सारे प्रत्याशी चुनाव में भाग ले रहे हैं लेकिन मुख्य मुक़ाबला इस बार राजग और महागठबंधन के बीच होने की उम्मीद है। राजग की ओर से एक बार फिर प्रमोद कुमार भाजपा के टिकट पर लड़ रहे हैं
वही दूसरी ओर महागठबंधन की और से विनोद श्रीवास्तव राजद के टिकट पर मैदान में हैं।हालाँकि मोतिहारी विस के लिए पहले महागठबंधन की सीट मणिभूषण श्रीवास्तव को दी गयी थी परन्तु पुनः उनसे यह सीट छीन कर विनोद श्रीवास्तव को दे दी गयी... दोनों अपनी जीत के दावे थोक रहे हैं।
वैसे तो पिछले 10 सालों में काफी विकास हुआ है शहर का लेकिन बीते एक साल में अपराध का स्तर बढ़ गया है। शहर के ह्रदय में स्थित मोतीझील जिसको पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है वो अबतक अतिक्रमणकारियों की मार झेल रही है। इसके विकास के लिए वादे तो सब करते है लेकिन चुनाव बाद भूल जाते हैं। शहर में होने वाली जाम की समस्या भी मुख्य मुद्दा है। इस से उबरने के लिए बलुआ ओवरब्रिज का निर्माण एक उपलब्धि है। अभी और भी काम करने की जरुरते हैं। इसके अलावे शहर में पानी निकलने की सुचारू व्यवस्था न होना, चीनी मिल का बंद होने जैसी और भी समस्याएं हैं।
बिहार में चुनाव हो और जाति आधारित समीकरण न हो ऐसा नही हो सकता। विनोद श्रीवास्तव जी अपनी पार्टी के परम्परागत वोट बैंक MY समीकरण के साथ ही कायस्थ वोटों की उम्मीद में हैं परन्तु मणिभूषण श्रीवास्तव की नाराजगी कुछ घातक हो सकती है और मणिभूषण समर्थक कुछ कायस्थ वोट कट सकता है...वैसे विनोद श्रीवास्तव के नामांकन समारोह की भीर भी राजनितिक विस्लेशको को सकते में ड़ाल दिया है... तो दूसरी ओर प्रमोद जी की सामजिक छवि अच्छी है और वो अपने क्षेत्र के लोगों से मिलते रहते हैं। पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखते हैं ये उनके पक्ष में है। ऊपर से मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ना भी उनके पक्ष में जा रहा है। एक बात तो तय लगती है की इस बार निर्णायक वोट उन युवाओं के होंगे जो पहली बार वोट डालने जा रहे हैं।इन सबो के बीच शहर के विकास की निम्नस्तरीय स्थिति को देखते हुए कउच्च युवा शहर वासिओ से नोटा दबाने की अपील कर रहे है ...कुल मिला के चुनाव दिलचस्प होगा। देखना है की लालू का समीकरण काम करता है या मोदी जी के वायदों में जनता फिर से विश्वास दिखाती है या फिर कोई तीसरा छुपा रुस्तम बन के बाजी मार लेता है।
प्रस्तुति:-प्रणय राज



प्रमोद जी ने विकास के नाम पर कुछ नहीं किया है उन्ही के गली मोहल्लों में लोग उनसे नाराज़ हैं।मेन रोड पर उनपर गर्म पानी भी फेका जा चूका है।कायस्थ बीजेपी का परम्परागत वोट रहा है।वो राजद में नहीं जायेगा।अगर जाती के आधार पर गोलबंदी होती है तो टक्कर कांटे की होगी।
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