Sunday, 11 October 2015

बेतिया विधानसभा एक नजर में

बापू की कर्मभूमि तथा अनेक वीर सपुतों की भूमि रही चंपारण की एक इकाई पश्चिम चम्पारण है।इसका जिला मुख्यालय बेतिया है।बेतिया तथा मझौलिया दो प्रखण्डों को मिलाकर बेतिया-मझौलिया विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की संज्ञा दी गई है।जिला मुख्यालय होने के कारण पुरे जिले की नजर इस क्षेत्र पर केन्द्रित है।
      बेतिया विधान सभा-2015 के चुनावी परिदृश्य पर चर्चा करने से पहले डालते हैं बेतिया के आम समस्याओं पर एक नजर-
जैसा कि बिहार के हर क्षेत्र में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है बेतिया भी इन समाजिक समस्याओं के चंगुल से मुक्त नहीं है।बेतिया छावनी में ओवरब्रिज की कमी अक्सर खलती है।इससे आये दिन वहां जाम की स्थिति बनी रहती है जिससे यातायात प्रभावित होता है तथा आम जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पडता है।अभी तक बेतिया के जनप्रतिनिधी सिर्फ वादे ही कर पाए हैं।अतः छावनी ब्रिज बनने के बारे में भविष्य में अभी कोई संभावना नजर नहीं आ रही है।पर्यटन और मनोरंजन की व्यवस्था भी काफी लचर है।2000 के दशक मे बेतिया मे पाँच सिनेमा घर हुआ करते थे तथा सभी के सभी नये तथा पुराने फिल्मों से गुलजार रहते थे।पर आज देखा जाए तो मात्र एक ही सिनेमाघर(जनता) की हालत संतोषजनक है बाकी सब की हालत दयनीय है।पर्यटन के क्षेत्र में देखा जाए तो बेतिया इसमें भी समस्याओं से जूझ रहा है।दो साल पहले बेतिया सागर पोखरा में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बोटिंग की व्यवस्था की गई थी लेकिन पर्याप्त देखरेख व रखरखाव में कमी के कारण वो बोट भी खराब हो गये तथा बोटिंग बंद हो गई।इसके अलावा क्षेत्र में बिजली की भी भारी किल्लत है।सडको के तरफ निगाह डालें तो बेतिया शहर में सडकों की हालत बद से बदतर है।नालों की उचित व्यवस्था नहीं रहने के कारण बरसात में नाले का पानी सडकों पर चला आता है।टुटे हुए सडकों पर ये पानी नारकीय स्थिति उत्पन्न कर देता हैं।
मोतिहारी से बेतिया को जोडने वाले NH-28 B की हालत तो बद से बदतर है।यदि कोई एक बार इस रास्ते से बस के द्वारा यात्रा कर ले तो वो दुबारा जाने की हिम्मत नही करेगा।
   सबसे दयनीय स्थिति बेतिया राज की है।राज के जमीन पर अतिक्रमणकारियों द्वारा अवैध कब्जा जारी है।राज देउड़ी में मौजुद राजघरानों की धरोहरें समुचित देखभाल के अभाव में बर्बाद हो रहे हैं।राजकचहरी मे मौजूद बेतिया राज से संबंधित दस्तावेज रखरखाव के अभाव में दीमक और टीड्डों का ग्रास बन रहे हैं।
 ये तो शहरी समस्याएं हैं अभी कई समाजिक तथा ग्रामीण समस्याओं से हमारा बेतिया विधान सभा क्षेत्र जुझ रहा है।जिला प्रशासन की बात की जाय तो वर्तमान जिलाधिकारी लोकेश कुमार के आने से भ्रष्ट कर्मचारीयों पर कुछ लगाम कसा है।वहीं वर्तमान एस.पी. विनय कुमार के द्वारा क्राइम कंट्रोल की कवायद कुछ हद तक संतोषजनक है।
बेतिया विधान सभा चुनाव - बिहार विधान सभा चुनाव-2015 का शंखनाद हो चुका है, चुनावी बिगुल बज चुके हैं।ऐसे में यहां के सियासी समीकरणों से आपको रुबरू कराने जा रहा हुँ।

बेतिया क्षेत्र से भाजपा की उम्मीदवार श्रीमती रेणु देवी(NDA) हैं जिन्होंने 8 अक्टूबर को अपना नामांकन पत्र दाखिल कर चुकी हैं।रेणु देवी वर्ष 2000 ई. से ही वर्तमान तक लगातार बेतिया क्षेत्र से विधायक पद पर बनी हुई हैं।पिछले विधान सभा चुनाव 2010 में इन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी श्री अनिल कुमार झा( निर्दलीय) को मतों के भारी अंतर से हराया था।इसमें रेणु देवी को 42010 मत तथा अनिल कुमार झा को 13221 मत मिले थे।इस बार अनिल कुमार झा द्वारा इस चुनाव में लडने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।वर्तमान में ये जदयू के नेता हैं।

महागठबंधन के तरफ से बेतिया की सीट कांग्रेस को मिली है तथा उम्मीदवार हैं श्री मदनमोहन तिवारी।ये पिछले विधान सभा -2010 में कांग्रेस से चुनाव लड़े थे तथा 12499 मतों के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे।
समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार श्री शंभू गुप्ता हैं।ये अपना नामांकन 10 अक्टूबर को किये।ये पिछले चुनाव 2010 में निर्दलीय चुनाव लड़े थे तथा इनको मात्र 3713 मत मिले थे।
जनता दल (R) से प्रत्याशी हैं रिजवानुल।ये 8 अक्टूबर को नामांकन पत्र दाखिल किये।
     अभी तक बेतिया विधान सभा क्षेत्र से इतने ही प्रत्याशीयों ने अपना नामांकन दाखिल किया है।बाकी आगे अभी भी समय है।निर्दलीय उम्मीदवारों में कौन कौन से चेहरे आते हैं ये तो वक्त ही बताएगा।वैसे कोई भी बड़ा चेहरा निर्दलीय से आता हुआ दीख नहीं रहा।
क्षेत्र में चारों तरफ चुनाव को लेकर काफी चर्चे हो रहे हैं।हर चाय व पान के दुकान चौक-चौराहों तथा गाँव देहात सभी जगह तर्क वितर्क होने लगे हैं।सभी आम जन चुनाव में खडे प्रत्याशीयों तथा उनके पार्टियों के चरित्र और उनके विकास के कार्य करने की योग्यता का समीक्षा करने में जुट गये हैं।
नेताजी लोगों का जनसंपर्क अभियान जोरशोर से जारी है।जनता प्रश्न पूछ रही है कि पुराने वादे कहाँ तक पुरे हुये या आप पर कैसे भरोसा करे।बेचारे नेताजी निरुत्तर हो जाते हैं।कहते हैं इसबार हम कार्य नहीं कर सके अगली बार जरुर करेंगे।एक बार हमें मौका दें कहकर आगे बढ जाते हैं।हास्यास्पद स्थिति उत्पन हो जाती है।
   वैसे कुछ दशकों का इतिहास देखा जाय तो बेतिया विधान सभा क्षेत्र भाजपा का गढ़ रहा है।यहां की वर्तमान विधायिका श्रीमती रेणु देवी 2000 ई. से हीं अभी तक लगातार जीत दर्ज करती आ रही हैं।परन्तु अभी के पार्टियों के गठबंधन पर नजर डाला जाय तो इस बार के चुनाव में काँटे की टक्कर होने की संभावना लग रही है।महागठबंधन में (राजद+जदयु+कांग्रेस) तीनों पार्टियों के गठजोड़ होने से जातीय समीकरण कुछ बदल गए हैं।इस कारण मुख्य लडाई रेणु देवी(भाजपा) और मदनमोहन तिवारी(कांग्रेस) के बीच हीं होगी।
  नेता अपना चुनावी बोल बोल रहे हैं तथा अपने लच्छेदार बातों से जनता को लुभा रहे हैं।पर सुविधाओं में उदासीनता को लेकर लोगों में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भारी आक्रोश का माहौल बना हुआ है।फिर भी अब देखना ये है कि जनता अपना कीमती मत देने में एक बार फिर भावनाओं में बहकर जातीय समीकरणों को अपनाती है या जातीय भेदभाव से ऊपर उठकर विकासवादी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए अपना मत योग्य उम्मीदवार या पार्टी को देकर अपने तथा अपने आने वाले भविष्य को संवारने का कार्य करती है।निश्चय हीं यह एक रोचक पहलु होगी जो अभी भविष्य के गर्त में है।

प्रस्तुति-: राजीव कुमार मिश्रा

1 comment:

  1. super se upar ,wah gajb ki jankari hai .....
    Very very thanks

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