आंदोलन के नेतृत्वकर्ता हैं राजेन्द्र महतो ।नेपाल के नए संविधान में मधेशियों को नेतृत्व बहुत ही कम दिए गए है मानो उन्हें उपेक्षित छोड़ दिया गया है ।..........सम्राट वीरेन्द्र के परिवार सहित हत्या के बाद नेपाल की बागडोर उनके छोटे भाई ज्ञानेन्द्र के हाथ में थी ।लेकिन उनका शासनकाल निरंकुश था । इस निरंकुश शासन को खत्म करने के लिए जनता ने हथियार उठाया। माओवाद के रूप में देश आंतरिक विद्रोह से जूझता रहा । देश की आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक स्थिति काफी खराब हो गई थी । विचारवान लोग , व्यवसायिक लोग पलायन कर गए थे । भ्रष्टाचार, व्याभिचार, दुराचार जैसी घटनाएँ बेलगाम हो गई थी । यहीं कारण था कि वहां की जनता ने सामूहिक विद्रोह किया , और अब जाकर संविधान बनने के साथ ही लोकतंत्र के बहाली का रास्ता साफ हो गया है जिसमें मधेशियों के लिए नेतृत्व के साथ ही साथ विभिन्न तरीकों से उपेक्षित रखा गया है यही कारण हैं कि मधेशीअपने पहाड़ी की तरह समान अधिकार के लिए लड़ रहें है ।जहाँ तक प्रश्न भारत का है तो वह keep and watch मोड में है ।china और Pakistan इसलिए इस संविधान का स्वागत कर रहें है क्योंकि वे मधेशियों को भारत के बसे हुए नागरिक बताते है ।यहाँ तक की वे मधेशी आंदोलन को भारतद्वारा पोषित भी दबे मुँह कह रहें हैं ।खैर अभी तक आंदोलन अहिंसी है .........आगे आगे देखिए होता है क्या......?
पढ़ते रहिए,
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www.biharsavera.blogspot.com
"बिहार सवेरा" के लिए नकुल कुमार की रिपोर्ट:-
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