जी हाँ माजरा कुछ ऐसा ही है वर्तमान के विधानसभा चुनाव में निषाद समाज NDA के संग है...
सूत्रों की माने तो NDA द्वारा निषाद समाज के प्रमुख नेता मुकेश सहनी को बिहार चुनाव में उचित सम्मान नही मिलने से निषाद समाज गुस्से में था परन्तु NDA द्वारा उन्हें मना लिया गया है ।
निषाद संघर्ष मोर्चा के सागर सहनी जी का कहना है की निषाद संघर्ष मोर्चा की भुमिका बिहार विधानसभा में NDA के साथ रहेगा और हमारी मांग है हमें अनुसुचित जनजाति में शामिल किया जाए ....
उनका यह भी कहना है की राजनीति में निषाद समाज की भूमिका शुरू से ही रही है और आगे भी रहेगी।
हालांकि सोशल मिडिया पर बाजार गर्म है की इस बार निषाद नेता मुकेश सहनी के अपमान का बदला निषाद समाज NDA से लेगा...
देखा जाए तो यह कहना गलत नही होगा की यह चुनाव मुद्दों की और नही जाकर जातिगत आधार पर लड़ा जा रहा है... मुद्दों की बात कोई राजनेता नही करता सब बड़े नेता अपने बयानों से जातिगत समीकरण बनाने में लगे है... कोई बीफ की बात कर मुसलमान वोटो को आकर्षित करता है तो कोई दलित के रखवाला बनने की बात कर दलित वोटो को हथियाना चाहता है......
देखते है आगे क्या होता है....
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मोतिहारी से विकाश जी की रिपोर्ट.

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