"बिहार सवेरा-ऑनलाइन न्यूज़" के लिए ढाका से ""तारिक अनवर चम्परानी" की स्पेशल रिपोर्ट...
पूर्वी चंपारण जिला एवं शिवहर लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत ढाका विधानसभा क्षेत्र पर समस्त उत्तर बिहार की नज़र है. पूर्व राज्यसभा सांसद स्वर्गीय मोतिउर्राहमान, बिहार प्रदेश काँग्रेस इकाई के वर्तमान उपाध्यक्ष श्री मनोज़ कुमार सिंह और पूर्व मे भाजपा के कद्दावर नेता अवनीश कुमार सिंह ढाका विधानसभा से पूर्व मे चुनाव जीतते आये है. वर्तमान मे वैश्य-समाज के मज़बूत नेता श्री पवन कुमार जायसवाल ढाका से विधायक है और भाजपा से चुनावी दंगल मे ताल ठोंक रहे है. महागठबंधन की टिकट पर पूर्व राज्यसभा सांसद स्वर्गीय मोतिउर्र्हमान के पूत्र और जद(यू) के पूर्व युवा अध्यक्ष श्री फैसल रहमान जी दूसरी बार क़िस्मत आज़मा रहे है.
ज्ञात हो की पिछली विधानसभा चुनाव मे श्री पवन जायसवाल ने श्री फैसल रहमान को मात्र 980 मतों से पराजित कर ताज़ पहना था. वर्तमान चुनाव मे स्थिति काफी विपरीत है. रलोसपा के पूर्व युवा उपाध्यक्ष रामपूकार सिन्हा ने पार्टी से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर ढाका की राजनीति मे घमाषाण मचा दिया है. उनकी शिक्षित होने की छवि ने मतदाताओं मे एक नया विकल्प दिया है. विधायक पवन कुमार जायसवाल अपने द्वारा किये गये विकास और कमल निशान को लेकर काफ़ी उत्साहित दिख रहे है. दूसरी तरफ, फैसल रहमान को पिता की विरासत और MY समीकरण मे कुर्मी समुदाय के जुड़ाव से चुनाव जीतने की काफ़ी संभावनाएं नज़र आ रही है.
विधायक पवन कुमार जायसवाल को काफ़ी जुझारू और संघर्षशील समझा जाता है. ढाका विधानसभा मे स्वर्गीय मोतिउर्रहमान साहब के बाद पवन जायसवाल को ही “विकास-पुरूष” समझा जाता है. विधायक का दावा है की उनकी अनुशंसा पर क्षेत्र मे अनेकों काम हुए है, उदाहरण के रूप मे प्रत्येक-गाँव मे ट्रान्स्फ़ोर्मर वितरण और चपाकल वितरण को बड़ी उपलब्धि मानते है. लेकिन, विधायक के गाँव स्थित मोतीहारी को सीतामढ़ी से जोड़ने वाली फूलवारिया घाट पूल पर अधूरी पड़ी पूल-निर्माण योजना को विरोधी विफलता को दर्शाते है. जबकि, विधायक, जमुआ घाट पर निर्माणाधीन पूल को अपनी सफलता का ही परिणाम बताते है. रामपूकार सिन्हा और फैसल रहमान दोनों ने विधायक की पूर्व मे अपराधी छवि को मुख्य मुद्दा बनाया है. विरोधियों का यह भी मानना है की पवन जायसवाल के कार्यकाल मे ढाका को सांप्रदायिकता के झोंके मे ढकेल दिया गया है.
खैर, अभी की स्थिति जो भी हो, आने वाले दिनों मे ढाका की चुनावी गर्मी मे जात-पात और धर्म घी का काम करेगी. ऐसा, इसलिए भी समझा जा रहा है की पूर्व के चुनावों मे स्वर्गीय मोतिउर्र्हमान और अवनीश कुमार सिंह एवं पवन जायसवाल और फैसल रहमान के बीच अंतिम लड़ाई धर्म और जाति के आधार पर ही ख़त्म हुई है । अब देखना यह है की इस बार जनता अपना रुख किधर करती है.....इसी तरह अन्य खबरों के लिए जुरे रहे हमारे पोर्टल से और पढ़ते रहिये "बिहार-सवेरा..ऑनलाइन न्यूज़"...!!
पूर्वी चंपारण जिला एवं शिवहर लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत ढाका विधानसभा क्षेत्र पर समस्त उत्तर बिहार की नज़र है. पूर्व राज्यसभा सांसद स्वर्गीय मोतिउर्राहमान, बिहार प्रदेश काँग्रेस इकाई के वर्तमान उपाध्यक्ष श्री मनोज़ कुमार सिंह और पूर्व मे भाजपा के कद्दावर नेता अवनीश कुमार सिंह ढाका विधानसभा से पूर्व मे चुनाव जीतते आये है. वर्तमान मे वैश्य-समाज के मज़बूत नेता श्री पवन कुमार जायसवाल ढाका से विधायक है और भाजपा से चुनावी दंगल मे ताल ठोंक रहे है. महागठबंधन की टिकट पर पूर्व राज्यसभा सांसद स्वर्गीय मोतिउर्र्हमान के पूत्र और जद(यू) के पूर्व युवा अध्यक्ष श्री फैसल रहमान जी दूसरी बार क़िस्मत आज़मा रहे है.
ज्ञात हो की पिछली विधानसभा चुनाव मे श्री पवन जायसवाल ने श्री फैसल रहमान को मात्र 980 मतों से पराजित कर ताज़ पहना था. वर्तमान चुनाव मे स्थिति काफी विपरीत है. रलोसपा के पूर्व युवा उपाध्यक्ष रामपूकार सिन्हा ने पार्टी से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर ढाका की राजनीति मे घमाषाण मचा दिया है. उनकी शिक्षित होने की छवि ने मतदाताओं मे एक नया विकल्प दिया है. विधायक पवन कुमार जायसवाल अपने द्वारा किये गये विकास और कमल निशान को लेकर काफ़ी उत्साहित दिख रहे है. दूसरी तरफ, फैसल रहमान को पिता की विरासत और MY समीकरण मे कुर्मी समुदाय के जुड़ाव से चुनाव जीतने की काफ़ी संभावनाएं नज़र आ रही है.
विधायक पवन कुमार जायसवाल को काफ़ी जुझारू और संघर्षशील समझा जाता है. ढाका विधानसभा मे स्वर्गीय मोतिउर्रहमान साहब के बाद पवन जायसवाल को ही “विकास-पुरूष” समझा जाता है. विधायक का दावा है की उनकी अनुशंसा पर क्षेत्र मे अनेकों काम हुए है, उदाहरण के रूप मे प्रत्येक-गाँव मे ट्रान्स्फ़ोर्मर वितरण और चपाकल वितरण को बड़ी उपलब्धि मानते है. लेकिन, विधायक के गाँव स्थित मोतीहारी को सीतामढ़ी से जोड़ने वाली फूलवारिया घाट पूल पर अधूरी पड़ी पूल-निर्माण योजना को विरोधी विफलता को दर्शाते है. जबकि, विधायक, जमुआ घाट पर निर्माणाधीन पूल को अपनी सफलता का ही परिणाम बताते है. रामपूकार सिन्हा और फैसल रहमान दोनों ने विधायक की पूर्व मे अपराधी छवि को मुख्य मुद्दा बनाया है. विरोधियों का यह भी मानना है की पवन जायसवाल के कार्यकाल मे ढाका को सांप्रदायिकता के झोंके मे ढकेल दिया गया है.
खैर, अभी की स्थिति जो भी हो, आने वाले दिनों मे ढाका की चुनावी गर्मी मे जात-पात और धर्म घी का काम करेगी. ऐसा, इसलिए भी समझा जा रहा है की पूर्व के चुनावों मे स्वर्गीय मोतिउर्र्हमान और अवनीश कुमार सिंह एवं पवन जायसवाल और फैसल रहमान के बीच अंतिम लड़ाई धर्म और जाति के आधार पर ही ख़त्म हुई है । अब देखना यह है की इस बार जनता अपना रुख किधर करती है.....इसी तरह अन्य खबरों के लिए जुरे रहे हमारे पोर्टल से और पढ़ते रहिये "बिहार-सवेरा..ऑनलाइन न्यूज़"...!!

लड़ाई कांटे की होगी
ReplyDeletewow so nice tarique bhai carry on
ReplyDeleteis bar ladai do group me hi nahi 3 group me hogi
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